24 March, 2025
"मेक इन इंडिया: वस्त्र एवं परिधान उद्योग के भविष्य का आधार"
Wed 02 Apr, 2025
संदर्भ :-
- मेक इन इंडिया पहल ने भारत को वैश्विक कपड़ा विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिचय :
- 2014 में शुरू की गई मेक इन इंडिया पहल ने भारत के वस्त्र और परिधान उद्योग को पुनर्जीवित करने और वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- यह उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है, जो सकल घरेलू उत्पाद में 2.3%, औद्योगिक उत्पादन में 13% और निर्यात में 12% का योगदान देता है। मेक इन इंडिया के तहत किए गए नीतिगत हस्तक्षेपों, बुनियादी ढांचे के विकास और कौशल विकास कार्यक्रमों ने भारत को वैश्विक कपड़ा क्षेत्र में एक पसंदीदा निवेश गंतव्य के रूप में उभरने में मदद की है।
वस्त्र उद्योग का वर्तमान परिदृश्य :
भारत का वस्त्र और परिधान उद्योग एक विविध और जटिल मूल्य श्रृंखला के साथ काम करता है, जिसमें निम्नलिखित प्रमुख विशेषताएं हैं:
- आर्थिक योगदान: 2023-24 में 34.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की कपड़ा वस्तुओं का निर्यात
- रोजगार सृजन: 45 मिलियन से अधिक लोगों को सीधे रोजगार, जिसमें महिलाएं और ग्रामीण आबादी शामिल
- एमएसएमई प्रभुत्व: उद्योग की लगभग 80% क्षमता सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों में फैली हुई
- उत्पादन क्षमता: प्रति वर्ष लगभग 22,000 मिलियन परिधानों का उत्पादन
सरकार ने कपड़ा उत्पादन बढ़ाने, निवेश को बढ़ावा देने और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें शामिल हैं:
वस्त्र उद्योग के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना:
- उद्देश्य: मानव निर्मित फाइबर (एमएमएफ) और तकनीकी वस्त्रों में विनिर्माण को बढ़ाना।
- बजट: ₹10,683 करोड़।
- प्रोत्साहन: बड़े पैमाने पर कपड़ा निर्माताओं के लिए वित्तीय प्रोत्साहन।
पीएम मित्र (मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड अपैरल) पार्क :
- उद्देश्य: कपड़ा निर्माण के लिए विश्व स्तरीय औद्योगिक अवसंरचना विकसित करना।
- फोकस: कपड़ा उद्योग की कुल मूल्य-श्रृंखला जैसे कताई, बुनाई, प्रसंस्करण, परिधान, कपड़ा निर्माण, प्रसंस्करण और कपड़ा मशीनरी उद्योग के लिए एकीकृत बड़े पैमाने पर और आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना सुविधा विकसित करना।
- बजट: 2021-22 से 2027-28 की अवधि के लिए ₹4,445 करोड़।
- प्रमुख लाभ: कम लॉजिस्टिक्स लागत, बढ़ी हुई एफडीआई और वैश्विक बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धा।
- वर्तमान स्थिति: गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना राज्यों में कुल 7 पार्क स्थापित किए गए हैं।
संशोधित प्रौद्योगिकी उन्नयन निधि योजना (एटीयूएफएस):
- उद्देश्य: पूंजी निवेश को समर्थन देने के लिए एमएसएमई संचालित कपड़ा उद्योग में बेंचमार्क क्रेडिट लिंक्ड प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए ऋण प्रवाह को प्रोत्साहित करना।
- बजट: ₹17,822 करोड़।
- प्रोत्साहन: प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए पूंजी सब्सिडी
समर्थ (वस्त्र क्षेत्र में क्षमता निर्माण योजना) :
- उद्देश्य: कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ साझेदारी में कपड़ा उद्योग में कामगारों को कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना।
- बजट आवंटन: वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान ₹115 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई, जिसमें से ₹114.99 करोड़ (99.9%) वितरित किए गए।
- वर्तमान स्थिति: 27 मार्च, 2025 तक समर्थ पोर्टल पर 4.78 लाख से अधिक उपयोगकर्ता पंजीकृत हो चुके हैं। 19 मार्च, 2025 तक कुल 3.82 लाख लाभार्थियों को प्रशिक्षित (उत्तीर्ण) किया जा चुका है और 2.97 लाख लाभार्थियों (77.74%) को प्लेसमेंट मिल चुका है।
टेक्स्टाइल क्लस्टर डेवलेपमेंट स्कीम (टीसीडीएस) :
- उद्देश्य: मौजूदा और संभावित कपड़ा इकाइयों/क्लस्टरों के लिए एकीकृत कार्यस्थल और संपर्क आधारित पारिस्थितिकी तंत्र बनाना ताकि उन्हें परिचालन और वित्तीय रूप से व्यवहार्य बनाया जा सके।
- लाभ: टीसीडीएस का क्लस्टर विकास मॉडल हस्तक्षेपों के अनुकूलन, संचालन में पैमाने की अर्थव्यवस्था, विनिर्माण में प्रतिस्पर्धात्मकता, लागत दक्षता, प्रौद्योगिकी और सूचना तक बेहतर पहुंच आदि के लिए महत्वपूर्ण लाभ लाएगा।
- बजट: ₹853 करोड़।
- वर्तमान स्थिति: 18 मार्च, 2025 तक, योजना के तहत लगभग 1.22 लाख रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं। 2024-25 के दौरान, ₹34.48 करोड़ जारी किए गए हैं।
राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (एनटीटीएम):
- उद्देश्य: देश में तकनीकी वस्त्रों को बढ़ावा देना।
- लक्ष्य वर्ष: 2020-21 से 2025-26
- बजट: ₹1480 करोड़
- फोकस: मिशन तकनीकी वस्त्रों में (i) अनुसंधान, नवाचार और विकास, (ii) संवर्धन और बाजार विकास (iii) शिक्षा और कौशल और (iv) निर्यात संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करता है ताकि देश को तकनीकी वस्त्रों में वैश्विक नेता के रूप में स्थान दिया जा सके।
- वर्तमान स्थिति: 1 जनवरी, 2025 तक, विशेष फाइबर और तकनीकी वस्त्रों की श्रेणी में ₹509 करोड़ (लगभग) मूल्य की 168 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
- वस्त्र मंत्रालय के लिए केंद्रीय बजट 2025-26
- आवंटन: ₹5272 करोड़ (2024-25 की तुलना में 19% वृद्धि)
मुख्य बिंदु:
- कपास मिशन: उत्पादकता बढ़ाने के लिए पंचवर्षीय योजना
- करघों पर कर छूट: शटल-रहित करघों पर शुल्क हटाया गया
- सीमा शुल्क वृद्धि: बुने हुए कपड़ों पर 20% या ₹115/kg (जो अधिक हो)
- हस्तशिल्प निर्यात: शुल्क-मुक्त आयात और निर्यात समय सीमा बढ़ी
- एमएसएमई समर्थन: निर्यात, ऋण, विनिर्माण और व्यापार मिशन पर जोर
वस्त्र एवं परिधान निर्यात बढ़ाने के लिए सरकारी कदम :
- आरओएससीटीएल योजना: निर्यात पर राज्य व केंद्रीय करों की छूट
- पीएलआई योजना: ₹1,355 करोड़ का कारोबार, ₹166 करोड़ का निर्यात
- मुक्त व्यापार समझौते: 14 एफटीए और 6 पीटीए, नए एफटीए वार्ता जारी
- गुणवत्ता नियंत्रण आदेश: घटिया आयात रोकने के लिए मानकों की अधिसूचना
- एमएमएफ सलाहकार समूह: मानव निर्मित फाइबर क्षेत्र के सुधार पर ध्यान
- निर्यात संवर्धन परिषदें: 11 ईपीसी, वैश्विक बाजारों में निर्यात को बढ़ावा
वस्त्र क्षेत्र में नवाचार :
- इनोवेशन चैलेंज: स्टार्टअप इंडिया व डीपीआईआईटी संग आयोजित, 9 विजेता सम्मानित
- अटल इनोवेशन मिशन: 6 विजेताओं को इनक्यूबेशन अवसर
- नेचर फाइबर बोर्ड: 3 अलग-अलग इनोवेशन चैलेंज
- एनजेबी टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन: 125 में से 3 विजेता
- सीएसबी स्टार्टअप ग्रैंड चैलेंज: 58 में से 4 विजेता
- सीडब्ल्यूडीबी वूल इनोवेशन: 24 में से 3 विजेता
- टिकाऊ नवाचार: 17 विजेता कपड़ा अपशिष्ट पुनर्चक्रण व जैव-आधारित फाइबर में सक्रिय
भारत में कपास उद्योग
- वैश्विक योगदान: भारत का कपास उत्पादन में 24% हिस्सा, विश्व में सबसे बड़ा कपास रकबा
- उत्पादन व उपभोग: भारत दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक और उपभोक्ता
- कपास की प्रजातियाँ: जी. आर्बोरियम, जी. हर्बेशियम, जी. बारबाडेंस, जी. हिर्सुटम
- प्रमुख क्षेत्र: उत्तरी, मध्य व दक्षिणी भारत
- महत्व: लाखों किसानों की आजीविका व विदेशी मुद्रा अर्जन में योगदान