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जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग की मांग

Tue 01 Apr, 2025

संदर्भ :-

  • आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री वाई. सत्य कुमार ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट की और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक सहयोग की मांग की।

जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) :

  • जीवित जीवों, कोशिकाओं और जैव अणुओं का उपयोग करके नई तकनीकों और उत्पादों को विकसित करने का विज्ञान है, जिसका उपयोग चिकित्सा, कृषि, औद्योगिक प्रक्रिया और पर्यावरण संरक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।
  • 1919 में इस शब्द को प्रस्तुत करने के लिए कैरोली एरेकी (1878-1952) को "जैव प्रौद्योगिकी का जनक" माना जाता है।
  • प्रोफेसर वीएल चोपड़ा को भारत में जैव प्रौद्योगिकी का जनक माना जाता है, उन्होंने देश में गेहूं उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • क्षेत्र: यह जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिकी और इंजीनियरिंग का एक संयोजन है

अनुप्रयोग:

  • चिकित्सा: बीमारियों का इलाज, निदान और उपचार
  • कृषि: फसलों में सुधार, कीटों से बचाव
  • औद्योगिक प्रक्रियाएँ: ईंधन और रसायन का उत्पादन
  • पर्यावरण संरक्षण: प्रदूषण नियंत्रण, कचरा प्रबंधन

जैव प्रौद्योगिकी के प्रकार:

  • हरित जैव प्रौद्योगिकी (Green Biotechnology):कृषि और खाद्य उत्पादन में उपयोग
  • लाल जैव प्रौद्योगिकी (Red Biotechnology):चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवा में उपयोग
  • श्वेत जैव प्रौद्योगिकी (White Biotechnology):औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग
  • नीली जैव प्रौद्योगिकी (Blue Biotechnology):समुद्री और जल संसाधनों में उपयोग

भारतीय जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र:-

  • भारत की जैव अर्थव्यवस्था जो 2014 के 10 बिलियन डॉलर से सोलह गुना बढ़कर 2024 में 165.7 बिलियन डॉलर हो गई है।
  • राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में 4.25% का योगदान करते हुए, इस क्षेत्र ने पिछले चार वर्षों में 17.9% की मजबूत चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) का प्रदर्शन किया है, जिसने जैव प्रौद्योगिकी में एक उभरती वैश्विक शक्ति के रूप में भारत को मजबूत किया है।
  • 2030 तक 300 बिलियन डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य के साथ, जैव अर्थव्यवस्था ज्ञान-आधारित, जैव-सक्षम अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

सरकारी पहल और प्रमुख कार्यक्रम: -

1. BioE3 नीति (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी)

  • BioE3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) नीति भारत के जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल है। 24 अगस्त 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नीति का उद्देश्य अच्छे प्रदर्शन वाले जैव विनिर्माण को बढ़ावा देकर और अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के प्रमुख स्तंभों को संबोधित करके भारत को एक वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी शक्ति में बदलना है।

भारत के फार्मा क्षेत्र में प्रमुख उपलब्धियां:

  • भारत किफायती, उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में उभरा है, जो मात्रा के हिसाब से फार्मास्यूटिकल उत्पादन में तीसरे स्थान पर और मूल्य के हिसाब से 14वें स्थान पर है।
  • कोविड-19 के लिए दुनिया का पहला डीएनए टीका विकसित किया, जो वैश्विक स्वास्थ्य में नवाचार को दर्शाता है।
  • दुनिया के 65% टीकों का उत्पादन करता है, जिससे निम्न और मध्यम आय वाले देशों को काफी लाभ हुआ है।
  • "मेक इन इंडिया" पहल मजबूत घरेलू विनिर्माण के माध्यम से आयातित सक्रिय दवा सामग्री (एपीआई) पर निर्भरता को कम कर रही है।
  • फार्मा उद्योग ने जेनेरिक-केंद्रित मॉडल से बायोफार्मास्युटिकल्स और बायोसिमिलर विकसित करने की ओर कदम बढ़ाया है।
  • भारत किशोर लड़कियों में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर (सर्वाइकल कैंसर) को रोकने के लिए पहले स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन पर काम कर रहा है।
  • विश्‍व में खपत होने वाली हर तीसरी गोली भारत में निर्मित होती है।

जैव कृषि (बायो एग्रीकल्चर) :

  • भारत में कृषि जैव प्रौद्योगिकी जीनोमिक्स, ट्रांसजेनिक और जीन संपादन के माध्यम से तेजी से विकसित हो रही है।
  • जलवायु-स्मार्ट फसलें: सूखा-सहिष्णु उच्च उपज वाली चना किस्म सात्विक (NC 9) स्वीकृत।
  • जीनोम-एडिटेड चावल: DEP1-एडिटेड MTU-1010 जैसी उन्नत किस्में विकसित।
  • जीनोटाइपिंग एरे: भारत की पहली 90K SNP एरे (IndRA - चावल, IndCA - चना) डीएनए फिंगरप्रिंटिंग में सहायक।
  • ऐमारैंथ संसाधन: 64K SNP चिप पोषण संबंधी जांच और मोटापा-रोधी किस्मों के विकास में मददगार।
  • बायोकंट्रोल: मायरोथेसियम वेरुकेरिया आधारित नैनो-फॉर्मूलेशन टमाटर और अंगूर में पाउडरी फफूंद का जैविक नियंत्रण करता है।
  • किसान-कवच: कीटनाशक-रोधी सुरक्षात्मक सूट किसानों को विषाक्त प्रभाव से बचाता है।

बायोटेक-किसान (बायोटेक-कृषि नवाचार विज्ञान अनुप्रयोग नेटवर्क) :

  • बायोटेक-किसान वैज्ञानिक-किसान साझेदारी कार्यक्रम है, जो महिला, ग्रामीण व आदिवासी किसानों को सशक्त बनाने के लिए हब-एंड-स्पोक मॉडल पर आधारित है और 115 आकांक्षी जिलों में सक्रिय है।

राज्यवार प्रभाव:

  • छत्तीसगढ़: जैव-फोर्टिफाइड चावल से आय 40-50% बढ़ी; 2173 किसान लाभान्वित।
  • पश्चिम बंगाल: 14 कृषि तकनीकों से 37,552 किसान प्रशिक्षित; 14 एफपीओ व 134 FIG बने।
  • मध्य प्रदेश: 8 जिलों में 67,630 किसानों को नई तकनीक का लाभ।
  • झारखंड: कोकून व खाद उत्पादन में 69-100% वृद्धि; 2100 परिवार जुड़े।
  • मेघालय-सिक्किम: फसल उत्पादन 18-20% बढ़ा; कीट 50% कम हुए।

जैव ऊर्जा (बायो एनर्जी) :

  • भारत का जैव ऊर्जा क्षेत्र जैव अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रहा है। इथेनॉल मिश्रण 2014 में 1.53% से बढ़कर 2024 में 15% हो गया है, जिसे 2025 तक 20% करने का लक्ष्य है।

मुख्य उपलब्धियां:

  • कच्चे तेल आयात में 173 लाख मीट्रिक टन की कमी
  • 99,014 करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा की बचत
  • CO₂ उत्सर्जन में 519 लाख मीट्रिक टन की कटौती
  • डिस्टिलर्स को 1,45,930 करोड़ और किसानों को 87,558 करोड़ रुपये का लाभ
  • 400+ आउटलेट्स पर E100 और 15,600+ स्टेशनों पर E20 ईंधन उपलब्ध

नोट :- जैव ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा का एक रूप है जो हाल ही में जीवित जैविक पदार्थों से प्राप्त होती है, जिसका उपयोग परिवहन ईंधन, ऊष्मा, बिजली और उत्पादों के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। जैव ऊर्जा को बायोमास के रूप में भी जाना जाता है।

BIRAC पहलों के माध्यम से बायोटेक नवाचार को बढ़ावा :

  • जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC), 2012 में स्थापित, भारत के बायोटेक स्टार्टअप को 95 बायो-इन्क्यूबेशन केंद्रों के माध्यम से फंडिंग, बुनियादी ढांचे और मेंटरशिप प्रदान कर रही है।

प्रमुख योजनाएं:

  • बायोटेक्नोलॉजी इग्निशन ग्रांट (BIG): ₹50 लाख (18 महीने), 1,000 इनोवेटर्स को समर्थन
  • सीड फंड: ₹30 लाख की इक्विटी सहायता (प्रूफ-ऑफ-कॉन्सेप्ट स्टार्टअप)
  • लीप फंड: ₹100 लाख की इक्विटी सहायता (व्यावसायीकरण हेतु)
  • जनकेयर - अमृत ग्रैंड चैलेंज: AI, ML, टेलीमेडिसिन व ब्लॉकचेन में 89 डिजिटल हेल्थ इनोवेशन का समर्थन

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