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MSP पर कृषि उपज की खरीद : केंद्रीय कृषि मंत्री की राज्य सरकारों से आग्रह

Fri 28 Mar, 2025

संदर्भ :-

  • केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 27 मार्च 2025 को सभी राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम कीमत पर कृषि उपज की खरीद न हो।
  • उन्होंने कहा कि अगले चार वर्षों (2028-29) तक तुअर (अरहर), उड़द और मसूर की उपज का 100 प्रतिशत MSP पर खरीदा जाएगा।

मुख्‍य बिन्‍दु :-

  • मुख्य उद्देश्य: किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम पर उपज बेचने से रोकना और आय बढ़ाना।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP):

  • वह न्यूनतम मूल्य है, जिस पर सरकार किसानों से फसल खरीदती है
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की प्रणाली को पहली बार 1966-67 में गेहूं के लिए पेश किया गया था और बाद में अन्य आवश्यक खाद्य फसलों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया गया।

मुख्य घोषणाएँ एवं प्रावधान :

  • दालों पर फोकस: तुअर (अरहर), उड़द, मसूर, चना, और सरसों जैसी फसलों की 100% खरीद MSP पर की जाएगी।
  • समयसीमा: अगले चार वर्षों (2028-29 तक) के लिए यह प्रक्रिया जारी रखने की घोषणा।
  • राज्यों की भूमिका: आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना, कर्नाटक आदि राज्यों में NAFED और NCCF के माध्यम से खरीद प्रक्रिया शुरू की गई है।

खरीद मात्रा:

  • 2025 रबी सीजन के लिए 37.39 लाख टन चना और मसूर तथा 28.28 लाख टन सरसों की खरीद मंजूर।
  • खरीफ सीजन में 13.22 लाख मीट्रिक टन तुअर की खरीद का लक्ष्य।

राज्यों से अपेक्षाएँ :

  • पारदर्शिता: राज्य सरकारों को खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और MSP से कम दाम रोकने के लिए सहयोग करना।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म: किसानों को NAFED के ई-समृद्धि और NCCF के ई-संयुक्ति पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए प्रेरित करना।
  • समय विस्तार: कर्नाटक जैसे राज्यों में खरीद अवधि को 90 दिन से बढ़ाकर 1 मई 2025 तक किया गया

MSP निर्धारण की प्रक्रिया:

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशें:

  • CACP, जो कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक सलाहकारी निकाय है, विभिन्न फसलों के लिए MSP की सिफारिशें तैयार करता है।
  • यह आयोग उत्पादन लागत, मांग-आपूर्ति की स्थिति, बाजार मूल्य प्रवृत्तियों (घरेलू और अंतरराष्ट्रीय), उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, और कृषि एवं गैर-कृषि क्षेत्रों के बीच व्यापार की शर्तों जैसे कारकों का मूल्यांकन करता है।

उत्पादन लागत के घटक:

  • CACP तीन प्रकार की उत्पादन लागतों का अनुमान लगाता है:
  • A2: किसान द्वारा बीज, उर्वरक, कीटनाशक, श्रम, पट्टे पर ली गई भूमि, ईंधन, सिंचाई आदि पर किए गए प्रत्यक्ष खर्च।
  • A2+FL: A2 लागत के साथ अवैतनिक पारिवारिक श्रम का अनुमानित मूल्य।
  • C2: A2+FL के अलावा स्वामित्व वाली भूमि और अचल पूंजीगत परिसंपत्तियों के लिए किराया और ब्याज

मंत्रिमंडलीय अनुमोदन:

  • CACP की सिफारिशों की समीक्षा के बाद, आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) MSP के स्तर और अन्य संबंधित सिफारिशों पर अंतिम निर्णय लेती है।

MSP के अंतर्गत फसलें:

  • वर्तमान में देश के किसानों से खरीदी जाने वाली 23 फसलों पर MSP लागू की गई है
  • अनाज - 7 : ज्वार, बाजरा, धान, मक्का, गेहूं, जौ और रागी
  • दाल - 5 : मूंग, अरहर, चना, उड़द और मसूर
  • तिलहन- 7 : सोयाबीन, कुसुम, मूंगफली, तोरिया-सरसों, तिल, सूरजमुखी और नाइजर बीज
  • वाणिज्यिक फसल - 3 : कपास, खोपरा और कच्चा जूट
  • गन्ना के लिए MSP के स्थान पर FRP का उपयोग किया जाता है।

उचित और लाभकारी मूल्य (Fair and Remunerative Price : FRP) :

  • वह न्यूनतम मूल्य है, जिसे चीनी मिलों द्वारा गन्ना किसानों को उनकी उपज के लिए भुगतान करना कानूनी रूप से अनिवार्य होता है। यह मूल्य गन्ना (नियंत्रण) आदेश, 1966 के तहत निर्धारित किया जाता है।

FRP निर्धारण की प्रक्रिया:-

  • सिफारिशें: कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) विभिन्न कारकों का विश्लेषण करके FRP की सिफारिश करता है।
  • अनुमोदन: आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA), जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं, CACP की सिफारिशों की समीक्षा करके अंतिम FRP को मंजूरी देती है।

FRP निर्धारण के प्रमुख कारक:

  • गन्ने की उत्पादन लागत।
  • चीनी की रिकवरी दर (गन्ने से प्राप्त चीनी की मात्रा)
  • चीनी और उसके उप-उत्पादों की बाजार कीमतें
  • किसानों के लिए उचित लाभ सुनिश्चित करना

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